मंगल पर दिखी ‘इंसानी जीभ’ और ‘घोड़े की नाल’, नजर आया एवरेस्ट से भी तीन गुना ऊंचा पहाड़

मंगल ग्रह हमेशा से ना सिर्फ वैज्ञानिकों बल्कि इंसानों के लिए भी दिलचस्पी का विषय रहा है. लाल ग्रह के बारे में जितनी जानकारियां मिलती हैं, वो हैरान कर देती हैं. अब यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) ने मंगल की हैरान कर देने वाली नई तस्वीरें जारी की हैं. ये तस्वीरें मंगल ग्रह के सबसे बड़े ज्वालामुखी, ओलंपस मॉन्स की हैं. यह ज्वालामुखी इतना बड़ा है कि इसकी ऊंचाई 26 किलोमीटर या माउंट एवरेस्ट से लगभग तीन गुना है. और इसका आधार 600 किलोमीटर से भी ज्यादा फैला हुआ है. लेकिन यहां बात सिर्फ इसके भीमकाय आकार की नहीं हो रही है. जो नई तस्वीरें सामने आई हैं, उसमें कई शानदार जानकारियां भी मिली हैं. यहां जमी हुई लावा की जीभ मिली है. नीचे एक रहस्यमयी घोड़े की नाल के आकार की नहर जैसी आकृति नजर आई है. वैज्ञानिक मान रहे हैं कि शायद यही वो रास्ता हो सकता है, जहां से ज्वालामुखी के तल पर पानी बहता था.

अगर कोई कवि इन तस्वीरों को देखता तो शायद यही कहता कि अरबों वर्ष तक एक जीभ पानी के इंतजार में पत्थर बन गई. लेकिन ईएसए के मुताबिक, लेकिन असल में यह केवल ठोस लावा से बनी एक चट्टान है जो शायद मंगल ग्रह की सतह पर पानी ले आई होगी. इन तस्वीरों को ईएसए के मार्स एक्सप्रेस ऑर्बिटर ने लिया है, जो ज्वालामुखी और शायद हायड्रोलॉजिकल फोर्सेस की अब तक की सबसे साफ झलक दिखाती हैं, जिन्होंने इस जगह को यह आकार दिया. नई तस्वीरों में एक बड़ी चट्टान दिखाई दे रही है, जो 9 किलोमीटर ऊंची एक खड़ी चट्टान है, जो पूरी तरह से ओलंपस मॉन्स को घेरे हुए है. यह बहुत पुरानी विशाल भूस्खलनों से बनी थी, जिसने मंगल ग्रह के मैदानों में सैकड़ों किलोमीटर दूर तक मलबा फैला दिया था. मंगल का दक्षिण-पूर्वी किनारा लावा के इलाके को दिखाता है, जहां कभी पिघली हुई चट्टानें नीचे की ओर बहती थीं. ये प्रवाह पंखे के आकार के जमावों में फैल गए, जिससे चैनल बन गए और ठोस चट्टान में ठंडा होने से पहले ट्यूब बना लीं.

कुछ लावा प्रवाह चिकने, गोल ‘जीभ जैसे’ आकार में बन गए, जिससे पता चलता है कि मैदानी इलाकों तक पहुंचने से पहले पिघली हुई सामग्री कहां धीमी हुई और जम गई.