180 की स्पीड से दौड़ेगी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, रूट-किराया सबकुछ तय, जानिए खासियत

मोदी सरकार ने नए साल के पहले ही दिन देश को वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की सौगात दी है. देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन गुवाहाटी से कोलकाता तक चलेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी महीने में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के रूट, किराए और सुविधाओं की जानकारी दी है.

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन जनवरी में ही शुरू हो जाएगी. 15 से 20 जनवरी के बीच इसके उद्घाटन की उम्मीद है. संभावित तारीख 17 या 18 जनवरी है. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के संचालन से पूर्वोत्तर के लोगों को कोलकाता आने जाने में बहुत आसानी होगी. रेल मंत्री ने बताया कि अगले छह महीनों में 8 और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें आएंगी. जबकि पूरे साल भर में कुल 12 ट्रेनें पटरी पर उतरेंगी. स्लीपर वंदे भारत में यात्रियों का खास ध्यान रखा गया है. इसमें कई सारी सुविधाएं हैं जो बहुत एडवांस और बाकि ट्रेनों से अलग हैं.

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, गुवाहाटी से कोलकाता का थर्ड एसी का किराया 2300 रुपये जबकि सेकंड AC का किराया 3000 रुपये होगा. वहीं, फर्स्ट AC का किराया 3600 रुपये होगा. वंदे भारत स्लीपर एक सेमी हाई-स्पीड ट्रेन है, जो कुल 16 कोच की होगी. इसमें 11 थर्ड एसी, 4 सेकंड एसी और 1 फर्स्ट एसी कोच शामिल हैं. जिसमें थर्ड एसी में 611, सेकंड एसी में 188 और फर्स्ट एसी में 24 बर्थ हैं. ट्रेन में कुल 823 यात्री सफर कर सकेंगे. इसकी स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटा तक है.

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन

आरामदायक बर्थ: विशेष डिजाइन वाली बर्थें, जिनमें बेहतर कुशन और मुलायम गद्दे लगे हैं. लंबा सफर करने में थकान नहीं होगी.

ऑटोमैटिक दरवाजे: कोचों के बीच आने-जाने के लिए ऑटोमैटिक दरवाजे और वेस्टीब्यूल (जुड़े हुए गलियारे) की सुविधा है. जिससे चलते समय भी आसानी से घूमा जा सकता है.

बेहतर सस्पेंशन और कम शोर: ट्रेन में उन्नत सस्पेंशन सिस्टम लगा है, जिससे सफर शांत और आरामदायक रहेगा. शोर भी बहुत कम होगा.

सुरक्षा सुविधाएं: कवच एंटी-कोलिजन सिस्टम और इमरजेंसी टॉक-बैक सिस्टम है, जिससे आपातकाल में यात्रियों की आसानी से मदद होगी.

साफ-सफाई: डिसइन्फेक्टेंट तकनीक से कोच हमेशा साफ और कीटाणुमुक्त रहेंगे.

ड्राइवर केबिन: लोको पायलट के लिए आधुनिक कंट्रोल पैनल और सुरक्षा सिस्टम वाला एडवांस केबिन.

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